प्रागैतिहासिक काल

प्रागैतिहासिक काल
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प्रागैतिहासिक काल

प्रागैतिहासिक काल(प्राक् + इतिहास) अर्थात् इस काल का इतिहास पूर्णतः पुरातात्विक साधनों पर निर्भर है। इस काल का कोई लिखित साधन उपलब्ध नहीं है, क्योंकि मानव का जीवन अपेक्षाकृत असभ्य एवं बर्बर था ।

मानव सभ्यता के इस प्रारम्भिक काल को सुविधानुसार तीन भागों में बाँटा गया है—

(A) पुरापाषाण काल (Paleolithic Age),

(B) मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age),

(C) नव पाषाण काल (Neolithic Age) 

(A) पुरापाषाण काल :-

पुरापाषाण काल उपकरणों पर आधारित पुरापाषाण कालीन संस्कृति के अवशेष सोहन नदी घाटी, बेलन नदी घाटी तथा नर्मदा नदी घाटी एवं भोपाल के पास भीमबेटका नामक स्थान से चित्रित शैलाश्रयों तथा अनेक चित्रित गुफाओं से प्राप्त हुआ है। इस काल में हैण्ड-ऐक्स, क्लीवर और स्क्रैपर आदि विशिष्ट यन्त्र प्राप्त हुए हैं।

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(B) मध्य पाषाण काल :-

इस काल में प्रयुक्त होने वाले उपकरण बहुत छोटे होते थे इसलिए इन्हें ‘माइक्रोलिथ ‘ कहते हैं। इस काल में मध्य प्रदेश में आदमगढ़ और राजस्थान में बागोर से पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इस काल में मानव की अस्थियों का पहला प्रारूप प्रतापगढ़ (उ. प्र.) के सराय नाहर तथा महदहा नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।

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(C) नवपाषाण काल :-

नवपाषाण युगीन प्राचीनतम बस्ती पाकिस्तान में स्थित बलूचिस्तान प्रान्त में मेहरगढ़ में है। मेहरगढ़ में कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं। नवपाषाण काल में बुर्जहोम एवं गुफकराल (जो कश्मीर प्रान्त में स्थित हैं) से अनेक गर्तावास (Pit Dwelling, गड्ढाघर), अनेक प्रकार के मृद्भाण्ड एवं प्रस्तर तथा हड्डी के अनेक औजार प्राप्त हुए हैं।बुर्जहोम से प्राप्त कब्रों में पालतू कुत्तों को मालिक के साथ दफनाया जाता था ।

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Note Point :- 

  1. चिराँद (बिहार) नामक नवपाषाण कालीन पुरास्थल एकमात्र ऐसा पुरास्थल है, जहाँ से प्रचुर मात्रा में हड्डी के उपकरण पाये गये हैं। जो मुख्य रूप से हिरण के सींगों  के हैं।
  2. उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के निकट कोल्डिहवा एकमात्र ऐसा नवपाषाणिक पुरास्थल है जहाँ से चावल का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
  3. नवपाषाणिक पुरास्थल मेहरगढ़ से कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य एवं नवपाषाणिक प्राचीनतम बस्ती एवं कच्चे घरों के साक्ष्य मिले हैं।

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सिन्धु सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता :-

सर्वप्रथम चार्ल्स मौसान ने 1826 ई. में हड़प्पा टीले के बारे में जानकारी दी थी। सर जॉन मार्शल ने सर्वप्रथम इसे सिन्धु सभ्यता का नाम दिया। सन् 1921 ई. में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में राय बहादुर दयाराम साहनी ने पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) के माण्टगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा का अन्वेषण किया। इस सभ्यता का सबसे पूर्वी पुरास्थल आलमगीरपुर (उ. प्र. ) पश्चिमी पुरास्थल सुत्कागेण्डो ( बलूचिस्तान), उत्तरी पुरास्थल माँडा (जम्मू) तथा दक्षिणी पुरास्थल दैमाबाद (महाराष्ट्र हैं।

Note  Point :- 

  • स्टुअर्ट पिग्गट ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को सिन्धु सभ्यता की जुड़वाँ राजधानियाँ बताया है।

हड़प्पा के सामान्य आवास क्षेत्र के दक्षिण में एक कब्रिस्तान स्थित है जिसे समाधि आर-37 नाम दिया गया है। हड़प्पा से प्राप्त बर्तन पर स्त्री के गर्भ से निकला हुआ पौधा, पीतल का बना इक्का गाड़ी तथा गेहूँ और जौ के दाने के अवशेष प्राप्त हुए हैं। पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त के लरकाना जिले में सिन्धु नदी के दाहिने तट पर स्थित मोहनजोदड़ो का उत्खनन 1922 ई. में राखालदास बनर्जी ने करवाया।

 

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता की विशेषताएँ – Sindhu Ghati Sabhyata Question

(अ) नगर नियोजन- 

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के विकसित और उन्नत स्तर को प्रकट करने वाले अवशेषों में सबसे महत्वपूर्ण अवशेष इस सभ्यता से सम्बंधित नगरों के है। ऐसे नगरावशेषों में हड़प्पा व मोहनजोदड़ो (दोनों अब पाकिस्तान में) कालीबंगा (राजस्थान) राखीगढी (हरियाणा) तथा धोलावीरा लोथल (गुजरात) के अवशेष अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

इन नगरों के अवशेषों से यह तथ्य भी उद्घाटित होता है कि सिन्धु-सरस्वती सभ्यता काल के भारतवासी पहले योजना बनाकर अपने नगर और नगरों में निर्मित किए जाने वाले भवनों व आवास का निर्माण करते थे। उनका भवन निर्माण कला सम्बंधी ज्ञान आधुनिक स्थापत्य अभियांत्रिकी (सिविल इंजीनियरिंग) के स्तर का था।

(i) नगर की आवास योजना-

 सिन्धु- सरस्वती सभ्यता के नगरों की सुव्यवस्थित सड़क प्रणाली परिणामस्वरूप स्वतः नगरों की आवास योजना में एक व्यवस्था उत्पन्न हो गयी थी और नगर कई खण्डों और मोहल्लों में विभक्त होकर सुनियोजित स्वरूप में उभर गए थे। सामान्यतया प्रत्येक मकान में बीच में खुला आंगन रखा जाता था और आँगन के चारों तरफ कमरे बनाए जाते थे। लगभग सभी मकानों में पानी रखने के फिरोने या परेंडे, शौचालय और स्नानघर अलग से निर्मित होते थे।

(ii) सड़क व्यवस्थाः-

 सिन्धु-सरस्वती सभ्यता से सम्बद्ध नगरों की सड़कें पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की तरफ सीधी समानान्तर निर्मित की गयी थी। सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी, जहाँ.. चौराहे बने हुए थे। नगरों की मुख्य और बड़ी सड़क सामान्यतया 10 मीटर, छोटी सड़कें 5 मीटर तथा गलियाँ एक से दो मीटर तक चौड़ी होती थी। सड़कों के किनारों पर स्थान-स्थान पर कूड़ा-कचरा डालने के लिये कूड़ादान रखे रहते थे।

(iii) नगर की सफाई, जल निकास प्रणाली और स्वच्छता का प्रबन्धः- 

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता से सम्बंधित नगरों और नगरों के मकानों में स्वच्छता और सफाई की समुचित व्यवस्था देखने को मिलती है। नगरों की गलियों, सड़कों और मुख्य सड़कों पर बनी छोटी-बड़ी नालियों और गटरों से सहज में ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मकानों, मोहल्ला और पूरे नगर से गन्दा पानी बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था थी।

रोजमर्रा का कूड़ा -कचरा डालने के लिए सड़कों पर जगह-जगह कूडापा रखे जाते थे। सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के नगरों में निजी मकानों एवं नगरों में सार्वजनिक सफाई और स्वच्छता का जो प्रबन्ध नजर आता है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि सिन्धु-सरस्वती सभ्यता काल में भारतवासियों का जीवन उच्च स्तर का था। वे शोभा और दिखावे के स्थान पर सुविधा और उपयोगिता को अधिक महत्व देते थे और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक थे।

(iv) विशेष निर्मितियाँ:-

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता  काल के विभिन्न नगरों की पुरातात्विक खुदाई में कुछ विशेष प्रकार की निर्मितियाँ, भवन और इमारतों के भग्नावशेष निकले हैं। इसमें नगर की गढ़ी वाले भाग में रक्षा प्राचीर धातु पिघलाने के स्थान, भट्टियाँ, यज्ञवेदियाँ, विशाल स्नानागार तथा विशाल अन्नागार आदि प्रमुख हैं | ये अवशेष सभ्यता की उन्नत अवस्था व वैज्ञानिकता का प्रमाण हैं।

(आ) सामाजिक जीवनः- 

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता से सम्बंधित विभिन्न स्थानों पर खुदाई में ऐसी कई वस्तुएं मिली हैं, जिनसे यह पता चलता है कि उस काल में समाज कई प्रकार के काम-धन्धे करने वाले लोगों से मिलकर बना था। व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न कार्य कर सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखने में अपना योगदान देता था। धार्मिक, प्रशासनिक, चिकित्सा, सुरक्षा तथाउत्पादन प्रमुख कार्य थे।

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(इ) परिवार व्यवस्था :-

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता काल के भवनों व मकानों की व्यवस्था के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि उनके समाज की प्रमुख इकाई परिवार था बहुत अधिक संख्या में नारियों की मूर्तियाँ मिलने से यह माना जाता है कि सिन्धु -सरस्वती सभ्यता के काल के समाज और परिवार में नारी को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था।

पर्दा प्रथा प्रचलित नहीं थी। स्त्रियाँ चाँदी व तांबे के आभूषण पहनती थी। ये लोग सूती वस्त्र पहनते थे। इन्हें अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान भी था। मनोरंजन के साधनों में संगीत, नृत्य व शिकार प्रमुख थे। सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, चावल, दूध तथा मांसाहार का भोजन में उपयोग करते थे।

आर्थिक जीवन :-

(i) कृषि व पशुपालन- कालीबंगा में जुते हुए खेत के अवशेष मिले हैं। इससे लगता है किसिन्धु-सरस्वती सभ्यता के लोग खेती करते थे। वस्तुओं पर बने चित्रों के आधार पर पता चलता है कि सिन्धु-सरस्वती सभ्यता काल के लोग गेहूँ, जौ, चावल, तिल आदि की खेती करते थे। फल भी उगाते थे। कृषि के साथ पशुपालन सिन्धु-सरस्वती सभ्यता से सम्बद्ध लोगों का दूसरा मुख्य व्यवसाय था। पालतू पशुओं में गौ वंश का महत्व अधिक था।

(ii) व्यापार व वाणिज्य-  यहाँ के निवासी तांबे व कांसे के बर्तन व औजार बनाने के साथ ही मिट्टी के बर्तन व मटके बनाने की कला में निपुण थे। चन्हुदड़ो तथा कालीबंगा की खुदाई में तोल के अनेक बाट मिले हैं। मोहनजोदड़ो में सीप की एक टूटी पटरी (स्केल) मिली है। ये अवशेष उनके उन्नत और विकसित व्यापारिक एवं गणित सम्बंधी ज्ञान के परिचायक हैं।

गुजरात में लोथल नामक स्थान पर खुदाई में निकली एक गोदी (बन्दरगाह) के अवशेषों से पता चलता है कि यह समुद्री यातायात का प्रमुख केन्द्र था। मिस्र, सुमेर, सीरिया आदि दूर देशों से इनके घनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्ध थे। भारत व मेसोपोटामिया की खुदाई से प्राप्त वस्तुओं में समानता का मिलना इस बात का प्रमाण है कि उनमें आपस में वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता था। व्यापार की उन्नत व्यवस्था के कारण ही सिन्धु-सरस्वती सभ्यता को व्यापार प्रधान सभ्यता कहा जाता है।

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5) धार्मिक जीवन:-

सिन्धु-सरस्वती सभ्यता काल के लोग प्रमुख रूप से प्राकृतिक शक्तियों के उपासक थे तथा पृथ्वी, पीपल, नीम, जल, सूर्य, अग्नि आदि में देवी शक्ति मानकर उनकी उपासना करते थे। मूर्तियों और मुद्राओंतथा ताबीजों के विश्लेषण के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि बलि प्रथा तथा जादू-टोना आदि अन्धविश्वास भी प्रचलित थे लोथल, बनावली एवं राखीगढ़ी से प्राप्त अग्नि वेदिकाओं से लगता है कि वहाँ यज्ञों व अग्नि पूजा का प्रचलन रहा होगा। मूर्तियों की उपासना के लिए धूप जलाई जाती थी। मातृदेवी व शिव की उपासना भी की जाती थी। मृतक संस्कार शव को गाढ़कर या दाह-कर्म करके किया जाता था।

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(ऊ) सभ्यता का अवसान-

सिन्धु लिपि अभी सही ढंग से पढ़ी नहीं जा सकी है। अनुमान है कि इस सभ्यता का पतन प्राकृतिक कारणों से हुआ। वहाँ उस युग में रहने वाले निवासियों द्वारा परिश्रम से बनाए गए नगर भूपरिवर्तन से खण्डहर बन गए किन्तु उस अतीत में विकसित सभ्यता और संस्कृति के तत्त्व नष्ट नहीं हो सके। उनका आगे आने वाले युगों में भारतीय जन-जीवन में परोक्ष प्रभाव बना रहा । भारतीय संस्कृति के प्रारम्भिक चरणों के निर्माण में सिन्धु-सरस्वती सभ्यता का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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प्रागैतिहासिक काल के महत्वपूर्ण प्रश्न 

आज हम प्रागैतिहासिक काल (prehistoric times) से सम्बन्धित प्रश्नों के बारे में अध्धयन करेंगे ये सभी प्रश्न गत परीक्षाओं में पूछे गये है, आशा करता हूँ की आपको ये जानकारी पसंद आएगी. प्रागैतिहासिक काल के महत्वपूर्ण प्रश्न

1. संघावो गुफा किस समय की है ?
Ans. – मध्य पुरापाषण काल (पाकिस्तान )

2. किस स्थल से मानव शवाधान के प्रमाण मिले है ?
Ans. – लेखहिया
यह उत्तरप्रदेश में स्थित है यहाँ 17 शवाधान प्राप्त हुए है ,यह कैमूर की पहाड़ी में स्थित है ?

3. मातृ देवी की हड्डी से निर्मित आकृति कहाँ से प्राप्त हुई है ?
Ans. – बेलन घाटी – उत्तरप्रदेश
यह आकृति उच्च पुरा प्रस्तर युगीन है

4. पहिए का आविष्कार कब हुआ ?
Ans. – नव पाषाण काल में

5. मध्य पाषाण कालीन मानव शिकार के लिए किससे बने उपकरणों का प्रयोग करता था ?
Ans. – पत्थर

6. निम्न विशेषता किन सिक्को की है ?
ये भारत में सबसे पहले विधमान सिक्के थे
इन पर एक से अधिक पंच की मुहरे है
इन पर अनेक प्रकार के प्रतीक निरुपित होते है
इन पर हमेशा जारी करने वालो के उत्कीर्ण लेख नही होते है
Ans. – आहत/पंच मार्क सिक्के

7. इसामपुर (कर्नाटक ) सम्बन्धित है
Ans. – पाषाण उपकरण निर्माण का केंद्र

8. परागकण एवम् बीजाणुओ के परिक्षण के अध्ययन को क्या कहाँ जाता है ?
Ans. – पेलिनोंलोजी

9. सिक्को के अध्ययन को कहते है ?
Ans. – “न्यूमिस्मैटिक”

10. गुफ्कराल कहाँ स्थित है ?
Ans. – सिन्धु घाटी में

11. किस स्थल से स्थायी जीवन के प्राचीनतम प्रमाण मिले है ?
Ans. – मेहरगढ़
यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में है

12. रॉबर्ट बुस कूट कौन थे ?
Ans. – एक भू वैज्ञानिक
इन्होने भारत में प्रथम पूर्व पाषाणीक उपकरण की खोज की थी |उन्होंने यह उपकरण पल्ल्वरम (तमिलनाडु ) से प्राप्त किया था

13. निम्न में से प्रागैतिहासिक कालीन स्थल है ?
Ans. – भीमबेटका
जौरा(मध्यप्रदेश) तथा भीमबेटका प्रागैतिहासिक कालीन स्थल है,यहाँ से प्रागैतिहासिक कालीन चित्रित शैलाश्रयों के प्रमाण मिले है।

14. गंगा के मैदान में मानव बस्ती का प्राचीन अवशेष कहाँ मिला है
Ans. – कालपी
कालपी उत्तरप्रदेश में है,यह यमुना नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है,यहाँ से हाथी की सूंड का जीवाश्म तथा 4500 वर्ष पुराने औज़ार प्राप्त हुए है।

15. किस व्यक्ति ने पल्लवरम से प्रथम पूरा प्रस्तर युगीन औजार की खोज कर देश में प्रागैतिहासिक अध्ययन का रास्ता खोला?
Ans. – रॉबर्ट ब्रूस कूट

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16. निम्न में से किस घाटी में पुरापाषाण काल,मध्य पाषाणकाल व नव पाषाण काल के अवशेष एक क्रम में पाए गए है?
Ans. – बेलन घाटी

17. 7000 ईसा पूर्व की बस्ती एवं कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिले है?
Ans. – मेहरगढ़ पाकिस्तान

यह भारतीय उपमहाद्वीप का प्राचीनतम गाँव है,यहाँ से भैंसपालन के प्राचीनतम साक्ष्य मिले है,गेहूं व जौ के सर्वप्रथम साक्ष्य कपास,खजूर व अंगूर की खेती के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, मेहरगढ़ की बलूचिस्तान की रोटी की टोकरी कहाँ जाता है।

18. प्राचीनतम गौ शाला के साक्ष्य कहाँ से मिले है?
Ans. – महगरा (उत्तर प्रदेश )

19. विश्व में चावल के प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिले है?
Ans. – कोल्डिहवा (उत्तरप्रदेश)

20. इनाम गांव स्थित है?
Ans. – महाराष्ट्र

यहाँ से जोरवे संस्कृति के मृदभांड प्राप्त हुए है,यह बड़ी बस्ती थी, जो किलेबंद थी यहाँ घरो के प्रकार व बनावट अलग-अलग है जो कि वर्ग विभाजन के स्पष्ट साक्ष्य है।

21. निम्न में से कौनसा ग्रन्थ भारतीय व्यपारियो की कटाह द्वीप की यात्रा का वर्णन करता है?
Ans. – बावेरु जातक

22. नवपाषाण कालीन गर्तावसो( गड्ढा घर) के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए है?
Ans. – बुर्जहोम व गुफ़्कराल
ये दोनों जम्मू कश्मीर में है

बुर्जहोम- यहाँ मानव के साथ कुत्ते के दफनाने के अवशेष मिले है व झीलों के किनारे गर्तावास (गड्ढा घर) के साक्ष्य मिले है।
गुफ़्कराल – इसका अर्थ कुम्हार की गुफा होता है यहाँ गर्तावास बड़े पैमाने पर मिले है, यहाँ हड्डी के उपकरण भी मिले है।

23. किसने अपनी पुस्तक pre Historic India में पाषाणकाल के बारे में विस्तृत चर्चा की है?
Ans. – स्टुअर्ट पिग्गट

24. होमो इरेक्टस का कपाल कहाँ से प्राप्त हुआ है?
Ans. – हथनौरा( नर्मदा घाटी)

25. किस पुस्तक में प्रतिष्ठान एवं तंगर को दक्षिणपथ के अन्तर्राज्य बाजार कहाँ गया है?
Ans. – “पेरीप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी”

26. प्रागैतिहासिक मानव का प्राचीनतम जीवाश्म कहाँ से प्राप्त हुआ है?
Ans. – हथनौरा

27. शिशुपाल गढ़ (उड़ीसा) सम्बन्धित है-
Ans. – प्रारम्भिक ऐतिहासिक काल का नगरीय स्थल

28. कावेरी नदी पर स्थित संगम काल का समुद्र बंदरगाह/पत्तन था?
Ans. – पुहान

29. सातवाहन युग में अमरावती को किस नाम से जाना जाता था?
Ans. – धान्यकटक

30. मध्यपुरापाषाण कालीन संस्कृति को किस नाम से जाना जाता है?
Ans. – फलक संस्कृति

इसकी खोज H.D. सांकलिया ने की थी, यहाँ औजार फलक से बने होते थे, जैसे खुरचनी(स्क्रेपर) पॉइन्ट(तक्षिणी) बेधनी(ब्युरीन) . यहाँ उपकरण क्वार्ट्ज के साथ -साथ फिलन्ट,चर्ट व जेस्पर पत्थर के भी बने होते थे
स्थल- नेवासा,चिरकी(महाराष्ट्र) और हथनोरा मध्यप्रदेश में है

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31. भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक किसे कहाँ जाता है?
Ans. – ए. कनिघम को

ये 1870 से 1885 तक भारतीय पुरातत्व विभाग के निदेशक रहे थे, इन्हें प्राचीन मुद्राशास्त्र का अधिकारी विद्वान कहाँ जाता है।
प्रमुख ग्रन्थ- ‛the ancient geography of india’ ‛ द बुक ऑफ इंडियन एशज’

32. सुमेलित करो-
पुरापाषाण काल- शैलाश्रय अधिवास के प्रमाण
मध्यपाषाण काल- नदी तट आवास
नवपाषाण काल- गर्त अधिवास
ताम्रपाषाण काल- कच्चे एवं पक्के मकान
Ans. – सभी सही सुमेलित है

33. पेरीप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी नामक पुस्तक मुख्य रूप से किस पर प्रकाश डालती है ?
Ans. – व्यापार एवं वाणिज्य

34. किस संस्कृति के काल मापन का विशेष ज्ञान किस तरह के उत्खनन से होता है?
Ans. – लम्बवत उत्खनन

35. दक्षिण भारत की महा पाषाणिक समाधियां किस काल की है?
Ans. – लौह काल की

36. इतिहास का पिता किसे कहाँ जाता है?
Ans. – हेरोडोट्स को

37. इन्होंने “हिस्टोरिका” पुस्तक लिखी, जिसमे पांचवीं सदी ईसा पूर्व के भारत- फारस के सम्बंध का वर्णन किया है, इसके अनुसार डेरियस प्रथम ने फारस के यूनानी

Ans. – सैनिक स्काइलेक्स के द्वारा सिन्धु नदी से ईरान तक का जलमार्ग खोजा था।

38. असत्य कथन बताइए
दक्षिण भारत में गुण्टूर एवम् कुरनूल जिलो में पुरापाषाण कालीन कब्रे मिली है ?
कैमूर श्रेणी एवम् मिर्जापुर जिले में पुरापाषाण कालीन चित्रशाला मिली है
दक्षि भारत में लोह युग पाषाण युग के तुरंत बाद शुरू होता है
भारत में पूरापाषाण कालीन मानव अग्नि के प्रयोग से परिचित नही था अग्नि का प्रयोग मध्य पाषाण काल के अंतिम चरण या नव पाषाण काल में हुआ

Ans. – सभी सही है

39. प्रागैतिहासिक काल की जोती हुई भूमि खोजी गयी है
Ans. – कालीबंगा में
कालीबंगा राजस्थान में प्राक हडप्पा तथा हडप्पा कालीन संस्कृतियों के अवशेष मिले है

40. प्रागैतिहासिक कुल्हाड़िया प्राप्त हुई है ?
Ans. – अतिरम्पक्क्म से
यह पाषाणकालीन स्थल है यहाँ से हैण्ड एक्स, क्लीवर, तथा फलक उपकरण प्राप्त हुआ है ?

41. किस क्षेत्र के महापाषाण कालीन मृदभांडो का अंदर का रंग काला है तथा बाहर का रंग लाल है व इन रंगों के मृदभांडो पर अलग ही पुताई हुई है
Ans. – दक्षिण भारत

42. कुल्हाड़ी, गंडासा,विदारणी, खंडक उपकरण आदि औजार सम्बन्धित है?
Ans. – पुरापाषाण संस्कृति

43. सुमेलित करो
दमदमा- मध्यपाषाण काल
कुरनूल की गुफाएं- उच्च पुरापाषाण काल
टेक्क़ल कोट- नव पाषाणिक स्थल
Ans. – सभी सही सुमेलित है

दमदमा में पाषाणों पकरण, स्क्रेपर, चान्द्रिक, समबाहु त्रिभुज मिले है।
दमदमा उत्तरप्रदेश में स्थित है. यहाँ 41 नरकंकाल मिले है जिनमे 1 कब्र में तीन मानव कंकाल एक साथ मिले है और 5 कब्रों में युगल शवाधन व 35 कब्रों में एकल शवाधान के साक्ष्य प्राप्त हुए है||
टेक्कल कोट कर्नाटक में स्थित है

44. पाषाणकाल को कितने भागों में बाँटा गया है
Ans. – 3
पुरापाषाण काल- 5लाख से 10,000 वर्ष पूर्व
मध्यपाषाण काल – 10,000 से 8,000 वर्ष पूर्व
नव पाषाण काल – 8000 से 6000 वर्ष पूर्व

45. चिरांद स्थित है?
Ans. – बिहार

46. पीरकालम स्थित है?
Ans. – केरल में
पीरकालम शवाधान केन्द्र प्रसिद्ध है

47. सूची 1 को 2 से मिलाइए
अतिरम्पक्कम स्थल – पुरापाषाण काल
चापानी माण्डो – मध्यपाषाण काल
इनाम गाँव – ताम्रपाषाण काल
कुल्ली- पूर्व हड़प्पा

Ans. – सभी सही सुमेलित है

48. पाषाणकाल (प्रागैतिहासिक काल) को साक्ष्यों (लिखित, पुरातात्विक) के आधार पर इतिहास को कितने भागों में बाँटा गया है?
Ans. – 3

प्रागैतिहासिक काल- लिखित साक्ष्य उपलब्ध नही, पुरातात्विक साक्ष्य उपलब्ध
आद्य ऐतिहासिक काल- लिखित व पुरातात्विक साक्ष्य दोनों उपलब्ध परन्तु लिखित साक्ष्य पढ़ें नही जा सके है। उदहारण- सिन्धु सभ्यता
ऐतिहासिक काल- लिखित व पुरातात्विक साक्ष्य दोनों उपलब्ध व लिखित साक्ष्यों को पढ़ा जा सकता है।

 

49. भारत में प्रागैतिहासिक काल का जनक किसे कहाँ जाता है?
Ans. – डॉ प्राइमरोज
इन्होंने 1842 में कर्नाटक के रायचूर जिले में लिंगसुगुर नामक स्थान पर पाषाण उपकरण छुरा व तीर के फलक खोजे।

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प्रागैतिहासिक काल Based MCQ

 

1. भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य कहाँ मिलता है?
(अ) नीलगिरी पहाड़ियाँ

(ब) शिवालिक पहाड़ियाँ
(स) नल्लमाला पहाड़ियाँ
(द) नर्मदा घाटी

उत्तर :- (द) नर्मदा घाटी



2. ताम्राश्म काल में महाराष्ट्र के लोग मृतकों के शरीर को फर्श के नीचे किस तरह रखकर दफनाते थे?
(अ) उत्तर से दक्षिण की ओर
(ब) पूर्व से पश्चिम की ओर
(स) दक्षिण से उत्तर की ओर
(द) पश्चिमी से पूर्व की ओर

उत्तर :- (अ) उत्तर से दक्षिण की ओर

3. उत्खनित प्रमाणों के अनुसार पशुपालन का प्रारम्भ हुआ था –
(अ) निचले पूर्व पाषाण काल में
(ब) मध्य पूर्व पाषाण काल में
(स) ऊपरी पूर्व पाषाण काल में
(द) मध्य पाषाण काल में

उत्तर :- (द) मध्य पाषाण काल में

4. खाद्यानों की कृषि सर्वप्रथम प्रारम्भ हुई थी –
(अ) नव-पाषाण काल में
(ब) मध्य-पाषाण काल में
(स) पुरा-पाषाण काल में
(द) प्रोटो-ऐतिहासिक काल में

उत्तर :- (अ) नव-पाषाण काल में

5. मध्यपाषाणिक संदर्भ में वन्य धान का प्रमाण कहाँ से मिला था?
(अ) चोपानी माण्डो
(ब) सराय नाहर राय
(स) लेखहिया
(द) लंघनाज

उत्तर :- (अ) चोपानी माण्डो

6. निम्नलिखित में से किसे फलक संस्कृति’ कहा गया है?
(अ) निम्न पुरापाषाणकालीन संस्कृति
(ब) मध्य पुरापाषणकालीन संस्कृति
(स) उच्च पुरापाषणकालीन संस्कृति
(द) हड़प्पा संस्कृति

उत्तर :- (ब) मध्य पुरापाषणकालीन संस्कृति

7. सराय नाहर राय और महदहा सम्बन्धित है –
(अ) विन्ध्य क्षेत्र की नव-पाषाण संस्कृति से
(ब) विन्ध्य क्षेत्र की मध्य-पाषाण संस्कृति से
(स) गंगा घाटी की मध्य-पाषाण संस्कृति से
(द) गंगा घाटी की नव-पाषाण संस्कृति से

उत्तर :- (स) गंगा घाटी की मध्य-पाषाण संस्कृति से

8. प्राचीनतम कलाकृतियों का प्रमाण सम्बन्धित है –
(अ) निम्न पूर्व पाषाण काल से
(ब) मध्य पूर्व पाषाण काल से
(स) उच्च पूर्व पाषाण काल से
(द) मध्य पाषाण काल से

उत्तर :- (स) उच्च पूर्व पाषाण काल से

9. निम्न पूर्व पाषाण काल के मानव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही है?
(अ) वह पालिशदार कुल्हाड़ियों का प्रयोग करता था।
(ब) वह कोर-उपकरणों का प्रयोग करता था।
(स) वह पशु पालक था।
(द) वह लघु पाषाण उपकरणों का प्रयोग करता था।

उत्तर :- (ब) वह कोर-उपकरणों का प्रयोग करता था।

10. दक्षिण भारत की वृहद पाषाण समाधियाँ सम्बन्धित हैं –
(अ) पूर्व पाषाण काल से
(ब) नव पाषाण काल से
(स) ताम्र पाषाण काल से
(द) लौह काल से

उत्तर :- (द) लौह काल से

11. दक्षिण भारत की महापाषाणिक समाधियाँ किस काल से सम्बन्धित मानी जाती हैं?
(अ) पूर्व-पाषाण काल
(ब) नव-पाषाण काल
(स) ताम्र-पाषाण काल
(द) लौह काल

उत्तर :- (द) लौह काल

12. वृहद पाषाण स्मारकों की पहचान की गई है –
(अ) संन्यासी गुफाओं के रूप में
(ब) मृतक को दफनाने के स्थानों के रूप में
(स) मंदिर के रूप में
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर :- (ब) मृतक को दफनाने के स्थानों के रूप में
13. राख के टीले किस क्षेत्र की नवपाषाणिक संस्कृति से सम्बन्धित हैं?
(अ) पूर्वी भारत
(ब) दक्षिण भारत
(स) उत्तरी विन्ध्य क्षेत्र
(द) कश्मीर घाटी
उत्तर :- (ब) दक्षिण भारत

14. राख का टीला निम्नलिखित किस नवपाषाणिक स्थल से सम्बन्धित है?
(अ) बुदिहाल
(ब) संगन कल्लू
(स) कोलडिहवा
(द) ब्रह्मगिरी

उत्तर :- (ब) संगन कल्लू

15. ‘सिहावल’ एक पुरास्थल है –
(अ) निम्न पूर्व पाषाण संस्कृति का
(ब) मध्य पूर्व पाषाण संस्कृति का
(स) उच्च पूर्व पाषाण संस्कृति का
(द) मध्य पाषाण संस्कृति का

उत्तर :- (अ) निम्न पूर्व पाषाण संस्कृति का

16. पूर्व पाषाण कालीन मानव का मुख्य धंधा था –
(अ) कृषि
(ब) मिट्टी के बर्तन बनाना
(स) पशुपालन
(द) शिकार खेलना

उत्तर :- (द) शिकार खेलना

17. अल्मोड़ा के निकट लखुओडयार पर लाल रंग से उकेरी गई जो मानव आकृतियाँ मिली हैं, वे किस काल की हैं?
(अ) वैदिक काल
(ब) कुषाण काल
(स) पाषाण काल
(द) चन्द काल

उत्तर :- (स) पाषाण काल

18. लम्बवत् पुरातात्विक उत्खनन के द्वारा किसी संस्कृति के इनमें से किस पक्ष का विशेष ज्ञान होता है?
(अ) संस्कृति के क्षेत्र-विस्तार का
(ब) संस्कृति के आकार का
(स) संस्कृति के स्वरूप का
(द) संस्कृति के काल-मापन का

उत्तर :- (द) संस्कृति के काल-मापन का

19. निम्नलिखित में से किसको चालकोलिथिक युग भी कहा जाता है?
(अ) पुरा पाषाण युग (Old stone age)
(ब) नव पाषाण युग (New stone age)
(स) ताम्र पाषाण युग (Copper age)
(द) लौह युग (Iron age)

उत्तर :- (स) ताम्र पाषाण युग (Copper age)

20. प्राचीन काल में आर्यों के जीविकोपार्जन का मुख्य साधन था-
(अ) कृषि
(ब) शिकार
(स) शिल्पकर्म
(द) व्यापार

उत्तर :- (अ) कृषि

 

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